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सोनहत क्षेत्र में धड़ल्ले से संचालित हो रहे अवैध ईंट भट्ठे, पर्यावरण राजस्व का भारी नुकसान

शैलेश गुप्ता कोरिया// जिले के विकासखंड सोनहत के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का संचालन खुलेआम किया जा रहा है। बिना वैधानिक अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृति के चल रहे इन भट्ठों में बड़ी मात्रा में लकड़ी और अवैध कोयले का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

 

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जानकारी के अनुसार ईंट भट्ठा संचालित करने के लिए संबंधित संचालक को जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, राजस्व विभाग, खनिज विभाग तथा ग्राम पंचायत से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होता है। साथ ही भट्ठे की चिमनी, प्रदूषण नियंत्रण उपाय और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी जरूरी है। लेकिन सोनहत क्षेत्र में कई भट्ठे ऐसे हैं जो बिना किसी अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं।

 

*पर्यावरण को होने वाला नुकसान*

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अवैध ईंट भट्ठों में उपयोग होने वाली लकड़ी के कारण जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। वहीं कोयला जलने से निकलने वाला धुआं वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सूक्ष्म कण छोड़ता है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसका असर आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और त्वचा रोग की शिकायतें बढ़ सकती हैं।

 

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*शासन को राजस्व का नुकसान*

 

बिना अनुमति संचालित भट्ठों से शासन को रॉयल्टी, कर और अन्य शुल्कों के रूप में मिलने वाला राजस्व नहीं मिल पाता। साथ ही अवैध रूप से मिट्टी खनन किए जाने से कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है।

 

*क्या हैं नियम*

 

पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति अनिवार्य।

 

निर्धारित दूरी पर ही भट्ठे की स्थापना।

 

लकड़ी के बजाय स्वीकृत ईंधन का उपयोग।

 

मिट्टी खनन के लिए वैध अनुमति।

 

श्रमिकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था।

 

 

*कौन करता है कार्रवाई*

 

अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई का अधिकार जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, खनिज विभाग, वन विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के पास होता है। जांच में अनियमितता पाए जाने पर भट्ठा सील करने, जुर्माना लगाने और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई की जा सकती है।

 

*संभावित दंड*

 

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 तथा खनिज नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कारावास का प्रावधान है।

 

*जिम्मेदारों की सुस्ती और जल रहा अवैध ईंट भट्ठा*

 

सोनहत क्षेत्र में धड़ल्ले से रोड किनारे खेत में जगह जगह अवैध ईट भट्टो का संचालन हो रहा जिम्मेदार संबंधित विभाग की कोई कार्यवाही नजर नही आ रही जो संबंधित विभागीय शैली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाता है

 

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सोनहत क्षेत्र में संचालित अवैध ईंट भट्ठों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ शासन को हो रहे राजस्व नुकसान पर रोक लगाई जा सके।

- Ends ■

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दिनेश कांशी

"दिनेश कांशी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। डिजिटल मीडिया की गहरी समझ और खबरों को निष्पक्षता से पेश करने के उनके अनुभव ने 'भारत की आवाज़' को एक नई पहचान दी है। वे पत्रकारिता की सटीकता और सत्यता को सर्वोपरि मानते हैं।"

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