उद्देश्य कुमार साहू,
कोरिया, 9 अक्टूबर 2026, साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्तियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने तथा ठगी गई राशि की वसूली की प्रक्रिया में सहयोग देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बैकुण्ठपुर द्वारा पैरालीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री योगेश पारीक के मार्गदर्शन तथा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अमृता दिनेश मिश्रा के नेतृत्व में साइबर सेल के सहयोग से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय के सभागार में आयोजित हुआ।

माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश दिनांक 4 अगस्त 2026 के अनुपालन में छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा साइबर अपराध पीड़ित व्यक्ति को विधिक सहायता एवं ठगी गई राशि की वसूली योजना, 2026 तैयार की गई है। इस योजना के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बैकुण्ठपुर में साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा। यह प्रकोष्ठ साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्तियों को शिकायत दर्ज कराने से लेकर बैंक, साइबर पुलिस तथा न्यायालयीन स्तर पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया में सहायता प्रदान करेगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर सेल बैकुण्ठपुर, कोरिया के विशेषज्ञ श्री शिवम सिंह ने सक्रिय पैरालीगल वॉलंटियर्स को साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी से बचाव तथा साइबर सुरक्षा के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों, उनसे बचने के उपायों और पीड़ितों को समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में प्रशिक्षित किया।
प्रशिक्षण के बाद पैरालीगल वॉलंटियर्स आम नागरिकों के बीच पहुंचकर साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। साथ ही, साइबर अपराध से पीड़ित जरूरतमंद व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जोड़ेंगे और योजना के अंतर्गत उपलब्ध विधिक सहायता प्राप्त करने में सहयोग करेंगे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में बनेगा साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ
प्रस्तावित साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ में प्राधिकरण की सचिव, पैनल अधिवक्ता, पैरालीगल वॉलंटियर्स, साइबर पुलिस अधिकारी, बैंक के नोडल अधिकारी तथा संबंधित अभिलेखीय कर्मचारी शामिल होंगे। प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने, पुलिस एवं बैंक के साथ समन्वय स्थापित करने और मामलों की निगरानी करने की होगी।
यदि साइबर ठगी की राशि किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंच जाती है, तो प्रकोष्ठ पीड़ित को संबंधित खातों की पहचान तथा प्रचलित कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई में सहायता प्रदान करेगा।
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से साइबर ठगी के शिकार लोगों को विधिक सहायता प्राप्त करने में सहूलियत मिलेगी। साथ ही, आम नागरिकों में साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने और ठगी गई राशि की वसूली की प्रक्रिया में सहायता मिलेगी।
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