बिलासपुर।प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के हेमूनगर एवं देवरीखुर्द सेवाकेंद्रों द्वारा चैतन्य गणेश उत्सव का आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार इस प्रकार का आयोजन शहर ही नहीं पूरे प्रदेश में पहली बार हुआ। उत्सव में प्रतिदिन देवी-देवताओं के जीवंत स्वरूपों के दर्शन कराए गए। समापन पर शंकर जी, माता पार्वती, कार्तिकेय एवं श्रीगणेश के रूप में संपूर्ण शिव परिवार की मनमोहक झाँकी प्रस्तुत की गई।


दिव्य गुणों को धारण करने की विधि है राजयोग – BK लता दीदी
हेमूनगर सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी लता दीदी ने कहा कि शंकर-परिवार का स्वरूप संतुलित जीवन का प्रतीक है। शंकर जी का तपस्वी रूप एकाग्रता और विकारों पर विजय का, माता पार्वती पवित्रता और करुणा का, कार्तिकेय साहस और दृढ़ता का तथा श्रीगणेश श्रेष्ठ बुद्धि और विघ्नों पर विजय का संदेश देते हैं। इन गुणों को धारण करने की सहज विधि राजयोग मेडिटेशन है। परमपिता शिव परमात्मा सत्य ज्ञान देकर आत्माओं में सोई दिव्य शक्तियों को जागृत कर रहे हैं।

गृहस्थ में रहते हुए परमात्मा से जुड़ना ही राजयोग – BK उमा दीदी
देवरीखुर्द प्रभारी ब्रह्माकुमारी उमा दीदी ने कहा कि राजयोग का अर्थ संसार से दूर जाना नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए मन-बुद्धि को परमात्मा से जोड़ना है। श्रीगणेश का विशाल मस्तक विशाल सोच, बड़े कान धैर्य से सुनने और वाहन मूषक चंचल इच्छाओं पर नियंत्रण का प्रतीक है।
*अतिथियों ने की सराहना*

इस अवसर पर रेलवे के DMM भ्राता ओमप्रकाश जी ने कहा कि “आज तक मूर्ति के दर्शन किए थे, पहली बार जीवंत गणेश परिवार के दर्शन का सौभाग्य मिला।” डायमंड बेकरी के संचालक महेश उभरानी जी ने कहा कि यह आयोजन हर वर्ष होना चाहिए। इस अवसर पर मुकेश, मोहन, बी वेणुगोपाल, यु मुरली राव, लक्ष्मी यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजकों ने बताया कि सेवाकेंद्र में निःशुल्क राजयोग शिविर के माध्यम से आत्मा, परमात्मा, कर्मों की गति और मेडिटेशन की शिक्षा दी जाती है, जिससे जीवन शांत और मूल्यनिष्ठ बनता है।
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