रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह के भव्य मंच पर शुक्रवार को बिलासपुर की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना नृत्यविभूषण श्वेता नायक एवं उनके शिष्यों ने कुचिपुड़ी की भावपूर्ण एवं मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला मैदान में आयोजित समारोह में उनकी प्रस्तुति को दर्शकों की भरपूर सराहना एवं तालियाँ मिलीं।
नृत्यविभूषण श्वेता नायक कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम एवं मोहिनीअट्टम की सुविख्यात कलाकार हैं। छह वर्ष की आयु से शास्त्रीय नृत्य साधना प्रारंभ करने वाली श्वेता नायक दूरदर्शन की हाई-ग्रेडेड कलाकार हैं। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से नृत्य में स्नातक एवं परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है तथा वर्ष 2013 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ छात्रवृत्ति प्राप्त की। वे नाट्यचूड़ामणि डॉ. जी. रतीश बाबू की शिष्या हैं, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने कुचिपुड़ी नृत्य की गहन साधना एवं प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
चक्रधर समारोह में प्रस्तुत “शिवशक्ति समर्पण” की शुरुआत आदि शंकराचार्य द्वारा रचित “मीनाक्षी पंचरत्नम्” से हुई। रागमालिका एवं आदि तालम् में प्रस्तुत इस रचना के माध्यम से देवी मीनाक्षी के दिव्य स्वरूप, सौंदर्य और महिमा को कुचिपुड़ी की भावपूर्ण अभिव्यक्ति में प्रस्तुत किया गया।
इसके पश्चात “तरंगम्” के माध्यम से कुचिपुड़ी की विशिष्ट नृत्य परंपरा का सुंदर प्रदर्शन हुआ। जटिल पदसंचालन, लयकारी तथा पीतल की थाली पर संतुलित नृत्य ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। प्रस्तुति में भगवान शिव के गंगाधर, चंद्रचूड़ एवं आनंद नटराज स्वरूपों का भावपूर्ण चित्रण किया गया।
इस प्रस्तुति में डी. धारणी, श्रीदिप्ता पॉल, चेतन्या साहू, मेघा सारथी, ऐश्वर्या, श्वेता सालिनी नायक, एन. स्तुति रेड्डी, एन. दिव्यांका एवं हर्षिता कैवर्त सहित गुरु श्वेता नायक ने सहभागिता की। प्रस्तुति के संगीत संयोजन एवं गायन में श्रीमती रेणुका प्रसाद एवं श्री श्वेता प्रसाद का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
श्वेता नायक साई नृत्य निलयम्, बिलासपुर की संस्थापक एवं निदेशक हैं। वर्ष 2015 में स्थापित यह संस्था शास्त्रीय नृत्य के प्रशिक्षण, संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। श्वेता नायक देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दे चुकी हैं तथा मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम में भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित मंच पर श्वेता नायक एवं उनके शिष्यों की प्रस्तुति ने बिलासपुर की शास्त्रीय नृत्य परंपरा और नई पीढ़ी के कलाकारों की प्रतिभा को गौरवपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया।
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