सीपत(सतीश यादव ) – नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बावजूद मस्तूरी विकासखंड के करीब 40 से 45 अशासकीय विद्यालयों को अब तक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। विद्यालय संचालकों का कहना है कि पुस्तकों के अभाव में बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षक भी बिना किताबों के शिक्षण कार्य कराने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, विद्यालयों को 2 जुलाई तक पुस्तकें मिलने की उम्मीद थी। इसके लिए सभी स्कूल संचालक अपने-अपने वाहनों से गतौरी स्थित बुक डिपो पहुंचे, लेकिन वहां पता चला कि डीपीआई रायपुर से भेजी गई सूची में मस्तूरी ब्लॉक के कई निजी विद्यालयों के नाम ही शामिल नहीं हैं।

इस संबंध में बुक डिपो प्रभारी श्री ठाकुर से जानकारी लेने पर उन्होंने विद्यालय संचालकों को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बिलासपुर से संपर्क करने की सलाह दी। इसके बाद विद्यालय संचालकों ने जिला शिक्षा अधिकारी श्री जायसवाल से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। बताया जाता है कि विभागीय स्तर पर चर्चा के बाद सूची में कई विद्यालयों के नाम शामिल नहीं होने की त्रुटि स्वीकार की गई तथा इस पर खेद भी व्यक्त किया गया।
विद्यालय संचालकों का कहना है कि 13 जुलाई तक भी पुस्तकों की आपूर्ति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। उनका आरोप है कि कक्षावार पुस्तकों की जानकारी संकुल प्रभारियों द्वारा कई बार मांगी गई थी, इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में विद्यालयों के नाम सूची से गायब होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
इस मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मस्तूरी बीईओ कार्यालय द्वारा अशासकीय विद्यालयों की पूरी सूची समय पर जिला शिक्षा कार्यालय को नहीं भेजी गई, जिसके कारण कई विद्यालय सूची से बाहर रह गए।
विद्यालय संचालकों ने शासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि पुस्तकों की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई बिना किसी और देरी के सुचारु रूप से शुरू हो सके।

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