बिलासपुर हाँफा के प्राचीन मंदिर सिद्ध बघर्रा पाठ महाराज नृसिंह भगवान मंदिर में हर गुरुवार को धार्मिक आस्था और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है मंदिर में आयोजित होने वाले विशेष पूजा-पाठ, रामायण पाठ और संगीतमय गायन ने पूरे क्षेत्र के माहौल को भक्तिमय और आध्यात्मिक बना दिया है विशेष पूजा और आरती गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और उनके चौथे अवतार भगवान नृसिंह की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता हैं

इस पावन दिन पर मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य धनेश उपाध्याय जी द्वारा सुबह और शाम विशेष पूजा-अर्चना की जाती है एवं भगवान का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें नववस्त्र, पुष्प माला और विशेष भोग अर्पित किया जाता है संध्या पश्चात मंदिर परिसर में संगीतमय रामायण पाठ का आयोजन किया जाता है, जिसमें ग्राम वासी मानस प्रेमी भक्त एवं स्थानीय भजन मंडलियां और गायक बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं रामायण की चौपाइयों और दोहों के गायन से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठता है गायन की इस मधुर लहर में लीन होकर श्रद्धालु झूमते हुए नजर आते हैं


भक्तों की बढ़ती आस्था रामायण पाठ और गायन सुनने के लिए आसपास के गांवों और कस्बों से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं स्थानीय लोगों का मानना है कि इन आयोजनों से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आपसी भाईचारे की भावना मजबूत होती है एवं आचार्य जी ने बताया देवशयनी एकादशी व्रत कब रहना है पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई की सुबह 9 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 25 जुलाई की सुबह 11 बजकर 34 मिनट तक रहेगी सूर्योदय की तिथि के आधार पर इसका व्रत 25 जुलाई दिन शनिवार को रखा जाएगा इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है और भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं व्रत तोड़ने (पारण) का समय 26 जुलाई दिन रविवार 2026 को सुबह 05:39 बजे से 08:20 बजे के बीच रहेगा आयोजन के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महा आरती पश्चात प्रसाद वितरण किया गया जिसे पाकर भक्तों ने अपने जीवन को धन्य और सफल मान लिया इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष रूप से पंडित शत्रुघ्न उपाध्याय,पंडित रामकुमार उपाध्याय, पंडित रमेश अवस्थी, पंडित डॉ महेंद्र दुबे, पंडित संजय तिवारी, पंडित किरण दुबे, सुश्री सोनल उपाध्याय, पंडित महेश उपाध्याय,पंडित क्रियांश उपाध्याय,सुश्री हेमाक्षी उपाध्याय,भेदी कैवर्त, पंडित रमेश उपाध्याय ,रामलाल कश्यप, अवधेश गुप्ता, पंडित राजेंद्र तिवारी, पंडित केजू राम शर्मा,माधव श्रीवास,कौशल प्रसाद कोरी, ब्रम्हानंद यादव,पंडित निखिल पाण्डेय, पंडित सुजल उपाध्याय, पंडित जितेंद्र तिवारी, इन सभी भक्तों का विशेष सहयोग रहा





