दिमागी नक्सली’ बयान पर सियासत गरमाई, संजीव पाल ने पोस्टर के जरिए सरकार से पूछा—सवाल करना भी अपराध है क्या?

बिलासपुर। 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में ‘दिमागी नक्सली’ शब्द के इस्तेमाल का मुद्दा अब सियासी बहस का

बिलासपुर। 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में ‘दिमागी नक्सली’ शब्द के इस्तेमाल का मुद्दा अब सियासी बहस का विषय बनता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में जिला कांग्रेस सचिव संजीव पाल ने सोशल मीडिया पर पोस्टर जारी कर सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।

पोस्टर के जरिए संजीव पाल ने सवाल उठाया है कि “जो सरकार के कार्यों से सहमत न हो, क्या वह दिमागी नक्सली है?” इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि “जो सरकार से सवाल पूछे, क्या वह दिमागी नक्सली है?”

पोस्टर में सरकार द्वारा किए गए वादों की याद दिलाने और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों को लेकर भी इसी अंदाज में सवाल किए गए हैं। पोस्टर के अंतिम हिस्से में संजीव पाल ने लिखा है—“अगर ऐसा है, तो मैं हूं ‘दिमागी नक्सली’!”

कांग्रेस नेता का यह पोस्टर 15 अगस्त के प्रधानमंत्री के संबोधन में आए ‘दिमागी नक्सली’ संदर्भ को लेकर सरकार पर व्यंग्यात्मक और राजनीतिक प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। संजीव पाल ने पोस्टर के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि लोकतंत्र में सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना, असहमति व्यक्त करना और जवाब मांगना नागरिकों का अधिकार है।

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