नोनबिर्रा ÷ राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में 21वें राष्ट्रीय भोजली महोत्सव 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति, छत्तीसगढ़ गोंडवाना संघ एवं युवा प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, असम सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाजजन शामिल हुए। पूरे आयोजन स्थल पर पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति, गोंडी रीति-रिवाज एवं सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक पूजा-अर्चना एवं भोजली पूजन के साथ हुआ। पूज्य गुरुदादा–गुरुदाई माता दुर्गेश्वरी जी के विशेष आशीर्वाद एवं गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस महोत्सव ने समाज की सांस्कृतिक चेतना और संगठनात्मक शक्ति का परिचय दिया। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, प्रेम, भाईचारा, मित्रता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

महोत्सव में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य कमलेश्वर पटेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक नेता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुमाता दुलेश्वरी सिदार (पूर्व जनपद अध्यक्ष, पाली, जिला कोरबा) ने की।

इस अवसर पर गोंडवाना समिति छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष सुनऊ राम धुर्वे, गोंडी धर्म संस्कृति छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष चंद्रभान नेताम, राष्ट्रीय भोजली महोत्सव के संयोजक घनश्याम जगत, गोंडी धर्म संस्कृति मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रेम सिंह सिरसाम, संयोजक दिलीप सैयाम सहित विभिन्न राज्यों से आए सामाजिक प्रतिनिधियों ने समाज को संगठित रहने, अपनी संस्कृति को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा, लोककला और परंपराएं देश की अमूल्य धरोहर हैं। आधुनिकता के इस दौर में अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक गोंडी नृत्य, लोकगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं पारंपरिक कलाओं का भव्य प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया। पूरे दिन चले इस आयोजन में समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भोजली पर्व की गरिमा को और बढ़ाया।

राष्ट्रीय भोजली महोत्सव 2026 ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जुड़े रहकर ही समाज संगठित, मजबूत और प्रगतिशील बन सकता है। यह आयोजन आदिवासी समाज की एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक जागरूकता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा। महोत्सव में उपस्थित समाजजनों ने संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक इसकी गौरवशाली परंपराओं को पहुंचाने का कार्य निरंतर करते रहेंगे।





