जिम्मेदार विभागों की अनदेखी से जनता बेहाल, बारिश ने बढ़ाई मुसीबत; खम्हरियां–सोठी,जेवरा–खोंधरा सहित कई मार्गों की हालत बदतर
बिलासपुर। सीपत क्षेत्र की बदहाल सड़कों ने अब आमजन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सड़कें कम और गड्ढे ज्यादा नजर आ रहे हैं। जगह-जगह उखड़ी सड़क, बड़े-बड़े गड्ढे और उनमें भरा बरसाती पानी राहगीरों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालकों को हर कदम फूंक-फूंककर रखना पड़ रहा है।खम्हरियां से सोठी, जेवरा-खोंधरा,खम्हरियां–मड़ई–बिटकुला,खम्हरियां–उनी–अकलतरा और सीपत खम्हरियां–बलौदा मार्ग की हालत लगातार खराब होती जा रही है।

बारिश के बाद इन सड़कों पर बने गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों को गड्ढे की गहराई का अंदाजा तक नहीं लग पाता। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
⚠️ सड़क पर गड्ढे या गड्ढों में सड़क?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि वाहन चलाना किसी जोखिम से कम नहीं। खासकर सीपत-बलौदा मार्ग पर राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश के दौरान स्थिति और भी भयावह हो जाती है।इन जर्जर सड़कों से यात्री बस, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, मरीज, किसान, मजदूर और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है।

🛑 शिकायतों के बाद भी जिम्मेदारों की आंखें बंद!
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत और सुधार को लेकर कई बार संबंधित विभाग का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं?
बरसात में गड्ढों में पानी भरने के बाद सड़क की वास्तविक स्थिति छिप जाती है। रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है। एक छोटी सी चूक वाहन चालक को अस्पताल पहुंचा सकती है।

जनता की दो टूक—जल्द सुधारी जाए सड़क
क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जर्जर सड़कों का तत्काल निरीक्षण कर मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए। लोगों का कहना है कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी और क्षेत्र के विकास की लाइफलाइन हैं।

अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इन जर्जर सड़कों की सुध कब लेते हैं या फिर जनता को इसी तरह गड्ढों और कीचड़ के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहना पड़ेगा।





