दुख की घड़ी में सरपंच संजय राज बने सहारा,दो शोकाकुल परिवारों को दी आर्थिक सहायता

कोरबा – ग्राम पंचायत बोईदा के सरपंच संजय राज अपनी जनहितकारी पहल और संवेदनशील कार्यों के लिए लगातार चर्चा में हैं। पंचायत क्षेत्र में संचालित



कोरबा – ग्राम पंचायत बोईदा के सरपंच संजय राज अपनी जनहितकारी पहल और संवेदनशील कार्यों के लिए लगातार चर्चा में हैं। पंचायत क्षेत्र में संचालित श्रद्धांजलि योजना के माध्यम से वे शोकाकुल परिवारों को आर्थिक सहयोग प्रदान कर मानवता का परिचय दे रहे हैं।

इसी कड़ी में सरपंच संजय राज ने सराईपाली निवासी पुरन पटेल की माता के निधन पर उनके परिवार को श्रद्धांजलि योजना के तहत 2 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। वहीं ग्राम बोईदा निवासी रामनारायण कैवर्त के भाई के निधन पर भी उनके परिवार को 2 हजार रुपये की सहायता राशि देकर दुख की इस घड़ी में साथ खड़े होने का संदेश दिया।सरपंच संजय राज ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य के निधन के बाद परिजनों को मानसिक पीड़ा के साथ-साथ आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।इस दौरान विधायक प्रतिनिधि दुष्यंत शर्मा,पंच शांति लाल पटेल, द्वारिका यादव सहित शोकाकुल परिवार मौजूद रहे।विधायक प्रतिनिधि दुष्यंत शर्मा ने कहा कि सरपंच संजय राज की श्रद्धांजलि योजना मानवीय संवेदनाओं और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवारों को आर्थिक सहयोग देकर उनका मनोबल बढ़ाना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इस योजना से समाज में सहयोग और संवेदनशीलता का संदेश मिल रहा है तथा जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत हो रहा है।ऐसे समय में पंचायत की ओर से दिया गया छोटा-सा सहयोग भी पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत बन जाता है।गौरतलब है कि ग्राम पंचायत बोईदा में संचालित श्रद्धांजलि योजना के तहत अब तक 20 जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल चुका है। इस पहल की ग्रामीणों द्वारा सराहना की जा रही है और इसे सामाजिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया जा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच संजय राज केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुख-दुख में भी लोगों के साथ खड़े होकर जनप्रतिनिधि होने का दायित्व निभा रहे हैं। श्रद्धांजलि योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता मिलना पंचायत की एक सराहनीय पहल बन गई है।

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दिनेश कांशी

"दिनेश कांशी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। डिजिटल मीडिया की गहरी समझ और खबरों को निष्पक्षता से पेश करने के उनके अनुभव ने 'भारत की आवाज़' को एक नई पहचान दी है। वे पत्रकारिता की सटीकता और सत्यता को सर्वोपरि मानते हैं।"
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