Congress Plans Akhilesh Yadav Pressure: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है, लेकिन विपक्षी खेमे में सीटों और नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो चुकी है. कांग्रेस ने चुनावी तैयारी को नई दिशा देते हुए राज्य की लगभग 170 ऐसी सीटों की पहचान की है, जहां वह खुद को मजबूत दावेदार मान रही है. इसी के साथ पार्टी ने यह संकेत भी दिए हैं कि वह सिर्फ सहयोगी की भूमिका में रहने के बजाय सत्ता की लड़ाई में बड़ी हिस्सेदारी चाहती है.
कांग्रेस नेताओं के हालिया बयानों से साफ है कि पार्टी 2027 के लिए अपना राजनीतिक गणित तैयार कर रही है. पार्टी के भीतर यह राय मजबूत हो रही है कि गठबंधन तभी सफल होगा, जब सभी दलों को बराबरी का सम्मान और पर्याप्त सीटें मिलें. इसी रणनीति के तहत कांग्रेस छोटे और क्षेत्रीय दलों के साथ संवाद बढ़ाने पर भी विचार कर रही है.
किन दलों से संपर्क साध रही कांग्रेस
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी कवायद के बीच असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद के नाम भी चर्चा में हैं. ओवैसी पहले ही उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को विस्तार देने और मुस्लिम नेतृत्व के मुद्दे को लेकर सक्रिय हो चुके हैं. उन्होंने चुनावी अभियान की शुरुआत भी कर दी है और गठबंधन के लिए “सम्मान और बराबरी” की शर्त रखी है.
दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद भी स्वतंत्र रूप से चुनावी तैयारियों में जुटे हैं. उनकी पार्टी उम्मीदवारों के चयन और संगठन विस्तार पर काम कर रही है. ऐसे में दलित और मुस्लिम वोटों के इर्द-गिर्द नए समीकरण बनने की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं.
समाजवादी पार्टी को लग सकता है झटका
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा असर समाजवादी पार्टी पर पड़ सकता है. सपा का पारंपरिक समर्थन आधार दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वर्गों के बीच रहा है. यदि कांग्रेस, ओवैसी और चंद्रशेखर किसी साझा समझ की दिशा में बढ़ते हैं या अलग-अलग मैदान में उतरते हैं, तो विपक्षी वोटों का समीकरण बदल सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी की बढ़ती सक्रियता विशेष रूप से मुस्लिम वोटों के बंटवारे का कारण बन सकती है, जिसका असर सीधे सपा पर पड़ेगा.
उत्तरप्रदेश में सियासी पारा हाई
फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि 2027 के चुनाव में सिर्फ भाजपा बनाम सपा की लड़ाई नहीं होगी. कांग्रेस अपनी शर्तों पर गठबंधन और सीट बंटवारे की रणनीति तैयार कर रही है, जबकि ओवैसी और चंद्रशेखर जैसे नेता भी अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने में लगे हैं. ऐसे में आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए गठबंधन, नई दोस्ती और नए टकराव देखने को मिल सकते हैं.





