‘बीजेपी धर्मशाला नहीं है…’, बंगाल में BJP में बढ़ी बेचैनी! TMC से आए नेताओं पर उठ रहे सवाल

Bengal BJP: पश्‍च‍िम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही राज्य में अलग तरह की राजनीति देखने को मिल रही



Bengal BJP: पश्‍च‍िम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही राज्य में अलग तरह की राजनीति देखने को मिल रही है. इसके साथ ही ममता बनर्जी की टीएमसी में भी भगदड़ का माहौल बना हुआ है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई पुराने नेता ममता का साथ छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं. बस उन्हें बीजेपी के इशारे का इंतजार है. लेकिन बीजेपी अध्यक्ष के एक बयान ने दलबदलुओं की टेंशन बढ़ा दी है.

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नया समीकरण बनता दिखाई दे रहा है. चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेता और सांसद BJP के संपर्क में हैं, लेकिन इस संभावित एंट्री ने भगवा खेमे के अंदर ही असहजता बढ़ा दी है. पार्टी के कई पुराने नेताओं का मानना है कि बार-बार दूसरी पार्टियों से आने वाले चेहरों को महत्व देने से जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है.

 

बताया जा रहा है कि BJP अब बंगाल में “कोर कैडर” यानी पुराने और लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा दिखाने की रणनीति बना रही है. पहले भी TMC छोड़कर BJP में आए कई नेताओं को लेकर विवाद और अंदरूनी खींचतान सामने आ चुकी है.

 

भारतीय जनता पार्टी धर्मशाला नहीं

पश्‍च‍िम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने दलबदलुओं को लेकर साफ बयान द‍िया है, जिसमें उन्‍होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी धर्मशाला नहीं है कि कोई भी आ जाए चला जाए. जिन लोगों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की है, उनको किसी भी हालत में भारतीय जनता पार्टी में जगह नहीं दी जाएगी. दूसरी तरफ टीएमसी में बड़ी बगावत की तैयारी हो चुकी है. ऐसे में सबकी निगाहें बीजेपी के अगले कदम पर टिकी हैं.

 

बीजेपी की रणनीति पर कर रही काम?

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में दल-बदल का दौर और तेज हो सकता है. हालांकि BJP नेतृत्व फिलहाल संगठन को संतुलित रखने और आंतरिक असंतोष को रोकने की कोशिश में जुटा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आने वाले समय में टीएमसी के बागियों को पार्टी में जगह म‍िल पाएगी या नहीं

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दिनेश कांशी

"दिनेश कांशी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। डिजिटल मीडिया की गहरी समझ और खबरों को निष्पक्षता से पेश करने के उनके अनुभव ने 'भारत की आवाज़' को एक नई पहचान दी है। वे पत्रकारिता की सटीकता और सत्यता को सर्वोपरि मानते हैं।"
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