RBI का बड़ा फैसला! अब कागज नहीं, प्लास्टिक के होंगे भारतीय नोट?

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI जल्द



नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI जल्द ही प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले समय में भारतीयों को कागज के बजाय प्लास्टिक के नोट देखने को मिल सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में ₹10 और ₹20 के नोटों को पॉलीमर सामग्री में छापने पर विचार किया जा रहा है। ये नोट सबसे अधिक प्रचलन में रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में प्लास्टिक नोटों से उनकी उम्र बढ़ाने और लागत कम करने का प्रयास किया जाएगा।

क्यों खास होंगे प्लास्टिक के नोट?

विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। ये पानी से खराब नहीं होते, जल्दी फटते नहीं हैं और इन पर गंदगी का असर भी कम पड़ता है। इसके अलावा इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन समेत कई देशों में पॉलीमर नोटों का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। इन देशों में प्लास्टिक नोटों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माना गया है।

RBI ने पहले भी किया था प्रयास

गौरतलब है कि RBI ने वर्ष 2012 में भी कुछ शहरों में प्लास्टिक नोटों के परीक्षण की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर नई तकनीक और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

हालांकि RBI की ओर से अभी तक देशभर में प्लास्टिक नोट लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

मुख्य बातें

RBI प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट लाने की तैयारी में

₹10 और ₹20 के नोटों से हो सकती है शुरुआत

पानी से खराब नहीं होंगे नए नोट

नकली नोटों पर लग सकती है रोक

जल्द शुरू हो सकता है पायलट प्रोजेक्ट

Picture of दिनेश कांशी

दिनेश कांशी

"दिनेश कांशी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। डिजिटल मीडिया की गहरी समझ और खबरों को निष्पक्षता से पेश करने के उनके अनुभव ने 'भारत की आवाज़' को एक नई पहचान दी है। वे पत्रकारिता की सटीकता और सत्यता को सर्वोपरि मानते हैं।"
error: Content is protected !!