छत्तीसगढ़ कोरिया/कोरिया जिले में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही “2423 पान कंपनी” धान किस्म अब बड़े विवाद और जांच की मांग के घेरे में आ गई है। किसान कल्याण संघ के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मनीष साहू द्वारा जिला कलेक्टर कोरिया को विस्तृत आवेदन सौंपकर इस धान किस्म की वैज्ञानिक जांच, गुणवत्ता परीक्षण एवं आवश्यक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन की प्रतिलिपि उप संचालक कृषि, बैकुंठपुर को भी प्रेषित की गई है। मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि आवेदन पर कलेक्टर कार्यालय एवं कृषि विभाग की प्राप्ति मुहर भी लग चुकी है, जिसके बाद पूरे जिले में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार कोरिया जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में “2423 पान कंपनी” धान किस्म का रकबा लगातार बढ़ रहा है। अधिक उत्पादन एवं अधिक वजनदार होने के कारण किसान इस धान की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह धान अन्य पारंपरिक एवं स्थानीय किस्मों की तुलना में अधिक पैदावार देता है, जिससे व्यापारियों एवं कुछ निजी कंपनियों को भारी आर्थिक लाभ हो रहा है। लेकिन दूसरी ओर इस धान की गुणवत्ता, स्वास्थ्य प्रभाव एवं खेती में उपयोग होने वाले अत्यधिक रासायनिक खाद को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि इस धान की खेती में अत्यधिक मात्रा में यूरिया, डीएपी, रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का उपयोग करना पड़ता है। इससे खेती की लागत काफी बढ़ जाती है और धीरे-धीरे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबे समय तक अत्यधिक रासायनिक आधारित खेती जारी रही तो भविष्य में भूमि की उत्पादक क्षमता कम हो सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और खेती की स्थिरता पर पड़ेगा।
सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया है कि जिले में कुछ व्यापारियों एवं निजी धान कारोबारियों द्वारा स्थानीय धान को नई आकर्षक पैकेजिंग एवं नए ब्रांड नामों में भरकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। लोगों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि कई स्थानों पर साधारण लोकल धान को “2423 पान कंपनी” या अन्य आकर्षक नामों के पैकेट में भरकर किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। इससे किसानों को असली और नकली धान बीज के बीच अंतर समझना मुश्किल हो रहा है। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह किसानों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी एवं कृषि क्षेत्र में बड़े स्तर पर अनियमितता का मामला बन सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि इस धान की वास्तविक गुणवत्ता उतनी बेहतर नहीं है जितना इसका प्रचार किया जा रहा है। उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि यह धान खाने के लिए उपयुक्त नहीं है तथा इसके सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। कई लोगों का कहना है कि यह धान देखने में अधिक मोटा एवं वजनदार तो है, लेकिन स्वाद, पौष्टिकता एवं पारंपरिक गुणवत्ता के मामले में स्थानीय धान किस्मों से कमजोर है। आवेदन में मांग की गई है कि इस धान की गुणवत्ता, पोषण स्तर एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
किसान कल्याण संघ ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि बाजार में बिक रहे पैकेट बंद धान बीजों एवं धान किस्मों की जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं स्थानीय धान को नए नामों एवं आकर्षक पैकेजिंग में भरकर किसानों को गुमराह तो नहीं किया जा रहा है। साथ ही बीज विक्रेताओं, निजी कंपनियों एवं व्यापारियों के लाइसेंस, गुणवत्ता प्रमाणपत्र एवं वैधानिक अनुमति की भी जांच की मांग की गई है।
आवेदन में कहा गया है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो भविष्य में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। किसान महंगे दामों में बीज एवं खाद खरीदकर खेती करेंगे, जबकि उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भी निम्न गुणवत्ता अथवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक धान उपभोग करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
मांग की गई है कि कृषि विभाग, खाद्य विभाग एवं संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों की संयुक्त टीम गठित कर निम्न बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराई जाए —
2423 धान किस्म की वास्तविक गुणवत्ता एवं वैज्ञानिक मान्यता,
खेती में उपयोग होने वाले रासायनिक खाद एवं दवाइयों की मात्रा,
मिट्टी एवं पर्यावरण पर इसका प्रभाव,
मानव स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर पर प्रभाव,
बाजार में बिक रहे पैकेट बंद धान बीजों की सत्यता,
स्थानीय धान को नए ब्रांड में बेचने की शिकायतों की जांच,
किसानों एवं उपभोक्ताओं के हितों पर पड़ने वाले प्रभाव।
किसान कल्याण संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि यदि जांच में यह धान किस्म अथवा इससे जुड़ी गतिविधियां किसानों एवं उपभोक्ताओं के हित में अनुपयुक्त पाई जाती हैं, तो इसके उत्पादन, बिक्री, भंडारण एवं प्रचार-प्रसार पर तत्काल प्रतिबंधात्मक एवं नियामक कार्रवाई की जाए।
अब यह मामला केवल एक धान किस्म तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि किसानों के हित, उपभोक्ता सुरक्षा, कृषि व्यवस्था की पारदर्शिता एवं बाजार में संभावित गड़बड़ियों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। जिलेभर के किसान, व्यापारी एवं आम नागरिक अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।





